दोस्तों प्रस्तुत है मेरी रचना जिसका शीर्षक है " प्रिय राष्ट्र भाषा "
"एक मायूसी छाती है , जब तेरी याद आती है
भावनायें उठती है मन में, और यह रचना बनकर उतरती है"
"एक मायूसी छाती है , जब तेरी याद आती है
भावनायें उठती है मन में, और यह रचना बनकर उतरती है"
तेरे साथ, जिन्दगी के सफ़र की शुरूआत करता हूँ
इस जग को समझने का, एक सुन्दर एहसास लेता हूँ
खो गए वो पल, उन छोटी- छोटी खुशियों के
ना जाने क्यों, उन्हें अब भी याद करता हूँ|
इस जग को समझने का, एक सुन्दर एहसास लेता हूँ
खो गए वो पल, उन छोटी- छोटी खुशियों के
ना जाने क्यों, उन्हें अब भी याद करता हूँ|
