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प्रिय राष्ट्र भाषा!!

6:08 AM
दोस्तों प्रस्तुत है मेरी रचना जिसका शीर्षक है " प्रिय राष्ट्र भाषा "

"एक मायूसी छाती है , जब तेरी याद आती है 
भावनायें उठती है मन में, और यह रचना बनकर उतरती है"

तेरे साथ, जिन्दगी के सफ़र की शुरूआत करता हूँ
इस जग को समझने का, एक सुन्दर एहसास लेता हूँ
खो गए वो पल, उन छोटी- छोटी खुशियों के
ना जाने क्यों, उन्हें अब भी याद करता हूँ|

हम दीवानों की क्या हस्ती / भगवतीचरण वर्मा

12:13 AM
हम दीवानों की क्या हस्ती, आज यहाँ कल वहाँ चले
मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले

आए बनकर उल्लास कभी, आँसू बनकर बह चले अभी
सब कहते ही रह गए, अरे तुम कैसे आए, कहाँ चले

किस ओर चले? मत ये पूछो, बस चलना है इसलिए चले
जग से उसका कुछ लिए चले, जग को अपना कुछ दिए चले

दो बात कहीं, दो बात सुनी, कुछ हँसे और फिर कुछ रोए
छक कर सुख दुःख के घूँटों को, हम एक भाव से पिए चले

हम भिखमंगों की दुनिया में, स्वछन्द लुटाकर प्यार चले
हम एक निशानी उर पर, ले असफलता का भार चले

हम मान रहित, अपमान रहित, जी भर कर खुलकर खेल चुके
हम हँसते हँसते आज यहाँ, प्राणों की बाज़ी हार चले

अब अपना और पराया क्या, आबाद रहें रुकने वाले
हम स्वयं बंधे थे, और स्वयं, हम अपने बन्धन तोड़ चले


भगवतीचरण वर्मा ( 1903 ई-1981 ई.) हिन्दी जगत के प्रमुख साहित्यकार है। इन्होंने लेखन तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में ही प्रमुख रूप से कार्य किया।

शिक्षक दिवस पर कविता

9:37 PM
आदर्शों की मिसाल बनकर
बाल जीवन संवारता शिक्षक,

सदाबहार फूल-सा खिलकर
महकता और महकाता शिक्षक,

नित नए प्रेरक आयाम लेकर
हर पल भव्य बनाता शिक्षक,

संचित ज्ञान का धन हमें देकर
खुशियां खूब मनाता शिक्षक,

पाप व लालच से डरने की
धर्मीय सीख सिखाता शिक्षक,

देश के लिए मर मिटने की
बलिदानी राह दिखाता शिक्षक,

प्रकाशपुंज का आधार बनकर
कर्तव्य अपना निभाता शिक्षक,

प्रेम सरिता की बनकर धारा
नैया पार लगाता शिक्षक।
 
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